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और ज्यादा चाहिए ? कुछ काम जो आपको करना चाहिए


     हो सकता हैं कि कई लोग मेरे बातो से संतुस्ट  न हों | उनकी नजर में यह फिलॉसोफी ज्यादा हैं, और इसमें काम की बाटे काम हैं | मैं यह मानता हूँ की फिलॉसोफी भी उतना ही महत्वपूर्ण हैं जितना की काम की बाते | ऐसा कई लोग हैं जो सोचने के बजाय करना चाहते हैं और कुछ लोग भी हैं जो सोचते हैं परन्तु करते कुछ नहीं हैं| मैं यही कहूंगा की मैं दोनों प्रकार के लोगो का संयोग हूँ | मैं नए विचारो को पसंद करता हूँ और मैं काम करना भी पसंद करता हूँ | 

     तो उन लोगो के लिए जो "किस तरह शुरू करें " के बारे में कुछ मार्गदर्शक बातें जानना चाहते हैं, मैं संक्षेप में कुछ ऐसा बाटे बताऊंगा जो मैं करता हूँ | 
  • आप जो कर रहे हैं, व करना बंद कर दें | दूसरे शब्दों में, अवकाश लें और आकलन करे के कोनसी चीज़ काम आ रही हैं और कोनसी चीज काम नहीं आ रही हैं | पागलपन की परिभासा यही हैं की आप वही चीज़ करते चले जाए और अलग परिणाम की अपेक्षा करे | जो सफल नहीं हो रहा हैं वह करना बंद कर दे और कुछ नया करने की खोज करे | 
  • नए विचारे की तलाश करे | नए निवेश के विचारे को लिए मैं पुस्तक की दुकाने में जाता हूँ और अलग अलग और अनूठे विषयों पर पुस्तकें ढूँढते रहता हूँ | मैं उन्हें फॉर्मूले का नाम देता हूँ जिसके बारे में कुछ भी नहीं जनता | उदाहरण के लिए मैंने एक पुस्तक की दुकान में जोएल मस्कोविट्ज़ की पुस्तक द 16 % सॉलूशन देखी | मैंने वह पुस्तक खरीदी और पढ़ डाली | 
     तत्काल काम करो ! अगले गुरुवार को बिलकुल मैंने वही किये जो पुस्तक में कहा गया था | मैंने हर कदम पुस्तक क अनुसार उठाया था | वकीलों के ऑफिसो या बैंको में मैंने रियल एस्टेट के सौदों के साथ भी यही किया हैं | ज्यादातर लोग तत्काल कदम नहीं उठाते हैं या वे एक तरह से हर बात का इंतजार करते हैं कि कोई आएगा और उन्हें बताएगा कि उनके द्वारा सीखा गया न्य फॉर्मूला गलत हैं और उसका अनुसरण करना बिलकुल बेकार हैं | मेरे पडोसी ने मुघे बताया की मेरा 16 % का  फॉर्मूला क्यों बेकार हैं | दरअसल, मैंने उनकी बातो पर इसलिए ध्यान नहीं दिया क्योकि उसने कभी ऐसा करके नहीं देखा था | 
  • किसी ऐसे व्यक्ति को खोजों जिसने वह किया हो, जो आप करना चाहते हैं | उन्हें लंच पे ले जाये | उनसे टिप्स ले, व्यवसाय की बारीकियां समझें |  अपने 16  फीसदी के प्रमाणपत्रों के लिए मैंने काउंटी टैक्स ऑफिस गया और मने वहाँ पर काम करने वाली  सरकारी कर्मचारी को खोजा | मैंने यह पाया की वह भी इनमे निवेश करती हैं | तत्काल ही मैंने उसे लंच का न्योता दे दिया | उसने रोमांचित हो कर मुझे यह संघ दिया कि इसे कैसे करना हैं और उसने अपना सारा ज्ञान मेरे सामने पड़ोस दिया | लंच के बाद, उसने पूरा दिन मुझे  जगह दिखाई जहाँ मैं इस तरह के सौदे कर सकता था | अगले दिन तक मैंने उसकी मदद से दो बड़ी जायदादों को मैंने पा लिया था और मैं तब से उन पर 16 फीसदी की दर से व्याज कमा रहा हूँ | मुझे  पुस्तक पढ़ने में एक दिन लगा, कदम उठाने में एक दिन लगा, लंच में एक घंटा लगा और दो बड़े सौदे करने में केवल एक दिन लगा | 




























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